मरुथल जैसा मेरा जीवन... मरुथल जैसा मेरा जीवन...
धुंध ही रहेगी तुम्हारी आँखों मे उससे मुझे फर्क पड़ेगा भी तो क्या ? धुंध ही रहेगी तुम्हारी आँखों मे उससे मुझे फर्क पड़ेगा भी तो क्या ?
अरमा था तो बस इतना, की कोई सर पे प्यार से हाथ रखे अरमा था तो बस इतना, की कोई सर पे प्यार से हाथ रखे
उसी मृगी की तरह जो दम तोड़ देती है मरुथल में, पर रुकती नहीं। उसी मृगी की तरह जो दम तोड़ देती है मरुथल में, पर रुकती नहीं।
तुमको पा कश्मीर सा भोपाल सा खिलता हूँ मैं सच कहूँ तुम ही प्रिये मेरी राजधानी हो गई तुमको पा कश्मीर सा भोपाल सा खिलता हूँ मैं सच कहूँ तुम ही प्रिये मेरी राजधानी ...
आकाश को कृष्ण से श्वेत कब तक तू रंगवायेगा। नहीं करेगा तो चिंता से ठगा सा रह जाएगा।। पेट की अग्... आकाश को कृष्ण से श्वेत कब तक तू रंगवायेगा। नहीं करेगा तो चिंता से ठगा सा रह ज...